Fri, 21 Feb 2025 20:36:08 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
वाराणसी: अधिवक्ता संशोधन बिल के विरोध में शुक्रवार को वाराणसी के वकीलों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान वकीलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए काला कानून वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन से पहले वकीलों ने पूरे कचहरी परिसर का चक्कर लगाया और बांह पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज किया।
कलेक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के बाहर जुटे अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अधिवक्ताओं के हितों के साथ खिलवाड़ किया गया तो वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और आंदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होंगे। वकीलों ने कहा कि केंद्र सरकार अधिवक्ता समाज को सुरक्षा और सुविधा तो दे नहीं पा रही है, लेकिन उसकी आवाज दबाने का कुचक्र रच रही है।
इस प्रदर्शन में सेंट्रल बार अध्यक्ष मंगलेश दूबे, बनारस बार अध्यक्ष सतीश तिवारी, बार कौंसिल के विनोद कुमार पांडेय के साथ ही रोहित मौर्य, राहुल श्रीवास्तव, शाहनवाज खान, सुधा सिंह, संदीप मिश्रा समेत कई अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2025 में लाए जाने वाले अधिवक्ता संशोधन बिल से वकील समुदाय के हितों को गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि यह बिल अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और अधिकारों को सीमित करने वाला है।
बार काउंसिल के आह्वान पर सुबह से ही अधिवक्ता कचहरी में सेंट्रल बार के सभागार में जुटे और वहां से जुलूस की शक्ल में पूरे कचहरी परिसर में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां पर डीएम कार्यालय के बाहर पोर्टिको के नीचे उन्होंने प्रदर्शन किया।
वकीलों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वे आगे और बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे। उन्होंने कहा कि वकील समुदाय किसी भीमकाय सरकार के सामने झुकने वाला नहीं है और अपने अधिकारों के लिए लड़ता रहेगा।
इस प्रदर्शन के माध्यम से वकीलों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपने हितों से समझौता नहीं करेंगे और किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।