वाराणसी : गंगा नदी में नावों की टक्कर, पर्यटकों में मची अफरा-तफरी, बचाव अभियान जारी

वाराणसी में गंगा नदी में दो नावों की टक्कर में छोटी नाव के डूबने से पर्यटकों में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि जल पुलिस और NDRF ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर सभी को सुरक्षित निकाला।

Fri, 31 Jan 2025 13:04:54 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

वाराणसी में शुक्रवार सुबह गंगा नदी में दो नावों के बीच टक्कर हो गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद छोटी नाव डूबने लगी, जिससे पर्यटकों में हड़कंप मच गया। तुरंत जल पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। बड़ी नाव में सवार लोगों ने तत्परता दिखाते हुए डूबती हुई नाव के यात्रियों को सुरक्षित निकालने में सहायता की।

घटना वाराणसी के महान घाट के सामने हुई। जल पुलिस के अनुसार, अस्सी घाट से लगभग 10 पर्यटकों को लेकर एक छोटी मोटर बोट मणिकर्णिका घाट से लौट रही थी। इसी दौरान तेज गति में आ रही एक बड़ी मोटर बोट से उसकी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि छोटी नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह डूबने लगी। हालांकि, बड़ी नाव के नाविकों और यात्रियों ने तत्परता दिखाते हुए सभी पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया। जल पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची और सभी यात्रियों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।

इस घटना के बाद प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा नियमों को और कड़ा कर दिया है। जल पुलिस प्रभारी ने बताया कि दोनों नावों के नाविकों से पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही, सभी घाटों पर अनाउंसमेंट कराया जा रहा है कि किसी भी नाव में निर्धारित संख्या से अधिक यात्री न बैठाए जाएं और सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि कोई नाव बिना लाइफ जैकेट के चलती पाई गई, तो उसे तत्काल सीज कर दिया जाएगा।

इस समय वाराणसी में भारी भीड़ है, क्योंकि काशी में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आए हुए हैं। प्रशासन के अनुसार, काशी में करीब 40 लाख लोग मौजूद हैं, जिसके चलते 31 जनवरी से 5 फरवरी तक दशाश्वमेध घाट से लेकर अस्सी घाट तक गंगा आरती को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस फैसले का मुख्य कारण सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना है, क्योंकि गंगा आरती के दौरान लाखों की भीड़ इकट्ठा हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

होटलों और धर्मशालाओं में सभी कमरे फुल हो चुके हैं, वहीं सरकारी स्टे कैंप भी पूरी तरह भरे हुए हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास लगभग 5 लाख लोग वाहनों का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर यात्री प्रयागराज महाकुंभ की यात्रा पर जाने वाले हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर गंगा घाट तक लगभग 5 किलोमीटर तक भक्तों की लंबी लाइन लगी हुई है।

भीड़ बढ़ने के पीछे प्रमुख कारणों में से एक प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुए हादसे के बाद रेलवे द्वारा 26 ट्रेनों को कैंसिल किया जाना है। बिहार और पश्चिम बंगाल से आने वाले यात्री काशी में ही उतरने लगे, जिससे भीड़ अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई। इसके अलावा, हादसे के बाद प्रयागराज से काशी की ओर आने वाले हाईवे को खोल दिया गया था, जबकि जाने वाले रास्ते को करीब 20 घंटे तक ब्लॉक रखा गया, जिससे भारी संख्या में लोग काशी आ पहुंचे।

गंगोत्री सेवा समिति प्रबंधन ने अपरिहार्य कारणों से दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती को 5 फरवरी तक स्थगित कर दिया है। समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस अस्थायी बदलाव को समझें और धैर्य बनाए रखें। अस्सी घाट और अन्य घाटों पर गंगा आरती आयोजित करने वाली समितियों ने भी प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। समिति ने भरोसा दिलाया है कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर गंगा आरती दोबारा शुरू कर दी जाएगी।

भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए हैं। क्राउड कंट्रोलिंग के लिए वाराणसी के जिलाधिकारी एस. राजलिंगम, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, कमिश्नर कौशल राज शर्मा, नगर आयुक्त अक्षत वर्मा सहित 100 से अधिक अधिकारी सड़क पर मौजूद हैं। प्रशासन ने 12 विभागों के अधिकारियों को जन सुविधाओं में मदद के लिए तैनात किया है।

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल लगातार अधिकारियों के साथ मिलकर भीड़ नियंत्रण की रणनीति बना रहे हैं। काशी, वरुणा और गोमती जोन के पुलिस अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। काशी विश्वनाथ धाम परिक्षेत्र में केंद्रीय सुरक्षा बल (CISF), पीएसी और पुलिस के करीब 500 जवान शिफ्टवार ड्यूटी पर हैं।

भीड़ नियंत्रण के लिए 5 फरवरी तक के लिए नई एडवाइजरी जारी की गई है। शहर के मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है, और चौक से गोदौलिया तक 10 प्रमुख प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनसे होकर भक्त मंदिर की ओर जा सकते हैं। 4 एसीपी, 10 ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 24 ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर, 164 हेड कांस्टेबल और 300 से अधिक होमगार्डों को भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात किया गया है। काशी जोन के DCP गौरव बंसवाल, ADCP सरवणन टी. दशाश्वमेध ACP अपने जोन में तैनात पुलिसबल के साथ बैरिकेडिंग पर डटे हैं।

काशी विश्वनाथ धाम के पांचों प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा को सख्त किया गया है। शुक्रवार सुबह तक लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और दर्शन के लिए घाटों पर पहुंच चुके थे। दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट और अस्सी घाट पर स्नान करने वालों की भारी भीड़ उमड़ी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार भीड़ नियंत्रण के लिए जुटे हुए हैं।

गोदौलिया से मैदागिन तक भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए कई घंटों से प्रतीक्षा कर रहे हैं। रातभर हजारों भक्त रेलिंग और बैरिकेडिंग के पास खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। शहर के प्रमुख 44 घाटों पर स्नान और पूजा के लिए भारी संख्या में लोग जुटे हुए हैं।

प्रशासन की ओर से लगातार अपील की जा रही है कि श्रद्धालु संयम और धैर्य बनाए रखें तथा प्रशासन द्वारा दी गई गाइडलाइंस का पालन करें। गंगा आरती की अस्थायी रोक के बावजूद प्रशासन श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहा है ताकि किसी को असुविधा न हो।

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