Fri, 28 Mar 2025 01:05:33 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
उत्तराखंड: प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस साल 30 अप्रैल से शुरू हो रही है, लेकिन इस बार यात्रियों को कुछ सख्त नियमों का पालन करना होगा। धार्मिक आस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए केदारनाथ-बद्रीनाथ पंडा समाज ने फैसला लिया है कि वीडियो रील बनाने वाले और यूट्यूबर्स को मंदिर परिसरों में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके साथ ही, VIP दर्शन के लिए पैसे देकर विशेष अनुमति लेने की व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है।
धार्मिक स्थलों पर सोशल मीडिया का दबदबा खत्म:
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया का क्रेज धार्मिक स्थलों तक भी पहुंच चुका था। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं के बजाय कंटेंट क्रिएटर्स और रील मेकर्स की भीड़ देखने को मिल रही थी। केदारनाथ सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने बताया कि पिछले साल वीडियो बनाने वालों के कारण काफी अव्यवस्था फैली थी।
राजकुमार तिवारी, अध्यक्ष, केदारनाथ सभा ने बताया कि समुद्र तल से 12,000 फीट ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम में ढोल-नगाड़ों का शोर सिर्फ रील बनाने के लिए किया जा रहा था, जिससे श्रद्धालु परेशान हो रहे थे। इस बार अगर कोई रील बनाते हुए पकड़ा गया, तो उसे बिना दर्शन लौटाया जाएगा।
30 अप्रैल से यात्रा, 2 मई को खुलेगा केदारनाथ धाम:
हर साल की तरह इस बार भी चारधाम यात्रा की शुरुआत 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन से होगी। इस दिन सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। 2 मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। 4 मई को भगवान बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
इसके साथ ही चारधाम यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो जाएगा।
VIP दर्शन भी नहीं, समानता पर जोर:
इस बार यात्रा में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। मंदिर प्रशासन ने पैसे देकर VIP दर्शन करने की व्यवस्था समाप्त कर दी है। यानी अब कोई भी श्रद्धालु सामान्य लाइन में लगकर ही दर्शन कर सकेगा। इस फैसले को धार्मिक समानता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
श्रद्धालुओं से अपील: नियमों का पालन करें
मंदिर प्रशासन और उत्तराखंड सरकार ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करें और धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखें। साथ ही, यात्रा में आने से पहले अपना रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से कराएं, ताकि किसी तरह की असुविधा न हो।
नए नियमों के तहत यात्रा और दर्शन को और भी पवित्र व सुव्यवस्थित बनाया जाएगा। इस बार चारधाम यात्रा में केवल आस्था की गूंज सुनाई देगी, कैमरों की फ्लैश नहीं।