काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रीति जिंटा ने किए दर्शन, लाल ओढ़नी और मास्क में छुपाई पहचान

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने अपनी मां के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए, जहाँ उन्होंने मास्क और लाल ओढ़नी पहनकर अपनी पहचान छिपाई और आम लोगों की तरह यात्रा का आनंद लिया।

Mon, 03 Mar 2025 13:09:28 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

वाराणसी: बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने हाल ही में काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। इस यात्रा के दौरान उन्होंने अपनी मां के साथ आम लोगों की तरह व्यवहार किया और भीड़ में खुद को छुपाकर रखा। मास्क और लाल ओढ़नी पहनकर उन्होंने अपनी पहचान को गुप्त रखा, जिससे कोई भी उन्हें पहचान नहीं पाया।

प्रीति जिंटा ने इस यात्रा का वीडियो 2 मार्च को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा, काशी की यह यात्रा बेहद रोमांचक रही। मेरी मां महाकुंभ में स्नान के बाद शिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करना चाहती थीं। जब उन्होंने यह बात मुझे बताई, तो मैंने तुरंत हां कर दी और हम काशी के लिए निकल पड़े।

यात्रा के दौरान प्रीति और उनकी मां ने आम लोगों की तरह व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि जब वे काशी पहुंचे तो वहां भीड़ इतनी अधिक थी कि सड़कें ब्लॉक हो गई थीं और कारों को आगे जाने की अनुमति नहीं थी। इसके बाद उन्होंने ऑटो रिक्शा और साइकिल रिक्शा का सहारा लिया और पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचे।

प्रीति ने लिखा, भीड़ बहुत थी, लेकिन हमें कोई परेशानी नहीं हुई। काशी के लोग बहुत अच्छे हैं। मैंने अपनी मां को कभी इतना खुश नहीं देखा। उन्हें देखकर मुझे एहसास हुआ कि सबसे बड़ी सेवा भगवान के प्रति नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के प्रति है।

इस यात्रा के दौरान प्रीति और उनकी मां ने आधी रात को मंदिर में आरती देखी। उन्होंने बताया कि वीआईपी सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास था।

इससे पहले, प्रीति जिंटा ने महाकुंभ मेले में संगम स्नान भी किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस अनुभव को साझा करते हुए लिखा था, कुंभ मेले में यह मेरा तीसरा मौका था और यह जादुई, दिल को छूने वाला, और थोड़ा दुखद भी था। जादुई इसलिए क्योंकि मैं यह नहीं बता सकती कि मुझे कैसा महसूस हुआ। दिल को छूने वाला इसलिए क्योंकि मैं अपनी मां के साथ गई थी और यह उनके लिए दुनिया से बढ़कर था। दुखद इसलिए क्योंकि मैं जीवन और मृत्यु के विभिन्न चक्रों से मुक्त होना चाहती थी, लेकिन मुझे जीवन और आसक्ति के द्वंद्व का एहसास हुआ।

प्रीति ने आगे लिखा, क्या मैं अपने परिवार, अपने बच्चों और अपने प्रियजनों को छोड़ने के लिए तैयार हूं? नहीं! मैं तैयार नहीं हूं। यह बहुत ही भावुक और विनम्र करने वाला होता है, जब आपको यह एहसास होता है कि आसक्ति के तार मजबूत और शक्तिशाली हैं।

प्रीति जिंटा की यह यात्रा न केवल उनके लिए बल्कि उनकी मां के लिए भी बेहद खास रही। उन्होंने इस यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया कि माता-पिता की खुशी ही सबसे बड़ी सेवा है।

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