Mon, 10 Feb 2025 22:37:33 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
प्रयागराज/कानपुर: फूलपुर के पंचायत विभाग में सफाई कर्मचारी ज्ञानदास (35 वर्ष) ने जालसाजों के धमकी भरे कॉल और ब्लैकमेलिंग के चलते मजबूर होकर आत्महत्या कर ली। कथित तौर पर क्राइम ब्रांच के अफसर बताकर धमकाने वाले गिरोह ने तीन दिन में उनसे 81 हजार रुपए ऐंठे। पुलिस ने कानपुर से चार आरोपियों, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है, को गिरफ्तार कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ज्ञानदास को 30 जनवरी से पहले कुछ अज्ञात नंबरों से कॉल आने शुरू हुए। कॉल करने वालों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि ज्ञानदास पर ड्रग्स बेचने का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्हें जेल भिजवाने की धमकी देकर पैसे मांगे गए। भयभीत ज्ञानदास ने अपने बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर किए, दोस्तों-रिश्तेदारों से 15 हजार रुपए उधार लिए और पत्नी के गहने तक 17 हजार में गिरवी रख दिए। कुल 81 हजार रुपए ट्रांसफर करने के बाद भी धमकी के कॉल जारी रहे। अंततः 30 जनवरी को उन्होंने फूलपुर के अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी।
मृतक के भाई प्रेमदास, जो मिर्जापुर में डीपीआरओ हैं, ने बताया कि ज्ञानदास की मौत के बाद उनके मोबाइल में लगातार कॉल आने का रिकॉर्ड और बैंक खाते से हुए लेनदेन ने संदेह पैदा किया। फतनपुर थाने के एसएचओ शैलेश यादव ने नंबर ट्रेस कर कानपुर के भीमसेन निवासी रोहित प्रजापति तक पहुंच बनाई। छापेमारी में रोहित के अलावा अभिमत सिंह चौहान, वीर प्रताप सिंह और एक नाबालिग को गिरफ्तार किया गया। चार अन्य संदिग्ध फरार हैं।
गिरफ्तार आरोपियों से क्राइम ब्रांच की नकली आईडी कार्ड, 6 मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, 16,030 रुपए नकद, गहनों के बिल और बैंक रसीदें बरामद हुईं। पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वे QR कोड भेजकर पैसे ट्रांसफर करवाते थे। प्रतापगढ़ के एसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा, "यह गिरोह सिस्टमेटिक तरीके से लोगों को फंसाकर पैसे ऐंठता था। आरोपियों के पिछले रिकॉर्ड की जांच चल रही है।
ज्ञानदास की आत्महत्या ने प्रशासनिक सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि वह पुलिस में शिकायत करने से डर गए थे, क्योंकि धमकी देने वाले खुद को अधिकारी बता रहे थे। पुलिस अब मृतक के मोबाइल से मिले डेटा के आधार पर गिरोह के नेटवर्क को उजागर करने में जुटी है।
पुलिस ने IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 420 (ठगी), 384 (ब्लैकमेलिंग) और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। नाबालिग को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा, जबकि अन्य आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।