Sun, 16 Mar 2025 19:41:00 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
लखनऊ: भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी एक बार फिर कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस बार निशाना बना है उनकी मासूम बेटी आयरा शमी को, जिन्होंने हाल ही में होली का त्योहार मनाया। मोहम्मद शमी की पूर्व पत्नी हसीन जहाँ द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई आयरा की रंग-गुलाल से सजी तस्वीर पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने भड़काऊ टिप्पणियाँ करनी शुरू कर दीं। रमजान के पाक महीने में बच्ची के होली खेलने को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी आलोचनाएँ की जा रही हैं।
हसीन जहाँ ने 14 मार्च को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर आयरा शमी की तस्वीर साझा की थी, जिसमें वह रंगों में रंगी हुई नज़र आ रही हैं। इस तस्वीर के वायरल होते ही कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने आयरा के अभिभावकों पर उसकी परवरिश को लेकर सवाल खड़े किए और रमजान, शरीयत व नमाज का हवाला देते हुए बच्ची के होली खेलने को अनुचित ठहराया।
इस विवाद में बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी भी कूद पड़े हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना रजवी ने अपने बयान में मोहम्मद शमी और उनके परिवार को नसीहत दी है। उन्होंने कहा, होली हिंदुओं का बड़ा त्योहार है, मुसलमानों को इससे दूर रहना चाहिए। अगर बच्ची नासमझ है तो बात अलग है, लेकिन समझदार होकर अगर कोई होली खेलता है, तो वह शरीयत के खिलाफ है और नाजायज है।
रजवी ने आगे कहा, मैंने पहले भी मोहम्मद शमी को सलाह दी थी कि वह अपने परिवार को शरीयत के अनुसार परवरिश दें। रमजान का महीना इबादत का है, इसमें ऐसे कार्यक्रमों से बचना चाहिए।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर भी निशाना
मौलाना रजवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, बोर्ड के जिम्मेदारान कहते हैं कि मुसलमान भारत में असुरक्षित हैं। मैं कहना चाहता हूँ कि भारत में मुसलमान पूरी आजादी के साथ अपने धार्मिक त्योहार मनाते हैं। नमाज, रोजा, हज, जुलूस, उर्स – सब कुछ बेखौफ होकर होता है। किसी को कोई खतरा नहीं है।
उन्होंने पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा जंतर-मंतर पर रमजान के दौरान प्रस्तावित धरने पर भी सवाल उठाए। "रमजान का महीना खुदा की इबादत के लिए है, न कि धरना-प्रदर्शन के लिए," मौलाना ने स्पष्ट किया।
भारत सरकार को दिया सुझाव
अपने बयान में मौलाना रजवी ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा कि जो लोग भारत में मुसलमानों को असुरक्षित बता रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश भेजकर वहाँ की स्थिति देखने दी जाए। "वहाँ की हालत देखने के बाद उन्हें खुद अहसास हो जाएगा कि भारत में मुसलमान कितनी आजादी और सुरक्षा के साथ रहते हैं," उन्होंने कहा।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर भी बहस को तेज कर दिया है। एक वर्ग कट्टरपंथी मानसिकता की आलोचना कर रहा है, तो वहीं कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था का विषय बता रहे हैं। क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके समर्थक खुलकर उनके परिवार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
यह पूरा मामला एक बार फिर इस सवाल को खड़ा कर रहा है कि क्या किसी के निजी जीवन में धार्मिक पहचान के आधार पर दखल देना उचित है।