Wed, 02 Apr 2025 11:36:11 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
मैनपुरी: शिक्षा का मंदिर, जहाँ ज्ञान और संस्कारों की रोशनी फैलनी चाहिए, वहां एक छात्र के साथ बर्बरता की खबर ने सभी को झकझोर कर रख दिया। किशनी थाना क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में 12वीं कक्षा के छात्र के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। आरोप है कि अनुसूचित जाति के इस छात्र ने प्यास लगने पर कक्षा में रखी एक बोतल से पानी पी लिया, जो कथित रूप से शिक्षक मंगल सिंह शाक्य की थी। बस इतनी सी बात पर शिक्षक ने छात्र को बेरहमी से पीटा, जातिसूचक शब्द कहे और यहां तक कि उसकी उंगलियां तक तोड़ दीं।
चीखता रहा छात्र, पर नहीं पसीजा शिक्षक का दिल:
पीड़ित छात्र के पिता दशरथ सिंह ने एसपी कार्यालय पहुंचकर इस अमानवीय कृत्य की शिकायत की। उन्होंने बताया कि उनका बेटा नरेंद्र प्रताप सिंह मेमोरियल उच्चतर प्राथमिक विद्यालय, हरीपुर, कैथोली में 12वीं का छात्र है। घटना 29 मार्च की है, जब गर्मी के कारण उसे प्यास लगी और उसने कक्षा में टेबल पर रखी बोतल से पानी पी लिया। यह देखकर शिक्षक मंगल सिंह आगबबूला हो गया। उसने पहले पानी की बोतल फेंकी और फिर छात्र को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
बंद कमरे में बेरहमी से पीटा, टूटी उंगलियां:
आरोप है कि जब छात्र ने माफी मांगी, तो शिक्षक ने उसे घसीटकर क्लासरूम में बंद कर दिया और वहां भी क्रूरता जारी रखी। छात्र चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन शिक्षक ने कोई रहम नहीं दिखाया। घर लौटने पर जब परिवार वालों ने देखा कि उसके शरीर पर नीले निशान थे और दो उंगलियां हिल भी नहीं पा रही थीं, तो वे तुरंत उसे डॉक्टर के पास ले गए। चिकित्सक ने बताया कि उसकी उंगलियां टूट चुकी हैं। बेटे की हालत देखकर परिजनों में गुस्से की लहर दौड़ गई।
पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच जारी:
घटना की शिकायत मिलते ही एसपी गणेश प्रसाद ने थाना किशनी पुलिस को तत्काल जांच के आदेश दिए। पुलिस ने आरोपी शिक्षक मंगल सिंह शाक्य के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और अन्य सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। एसपी गणेश प्रसाद ने कहा, हम किसी भी हाल में ऐसे अमानवीय कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेंगे, दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीआईओएस सतीश कुमार ने कहा कि अभी तक उनके कार्यालय में कोई शिकायत नहीं की गई है, लेकिन अगर कोई शिकायत आती है, तो निष्पक्ष जांच कराकर उचित कदम उठाए जाएंगे।
मानवता पर लगा कलंक:
इस घटना ने समाज में फैले भेदभाव और संवेदनहीनता की परतें उधेड़ दी हैं। क्या आज भी जाति और भेदभाव इतनी गहरी जड़ें जमा चुके हैं कि एक मासूम छात्र को अपनी प्यास बुझाने की सजा इस हद तक मिल सकती है? शिक्षा, जो समाज को एक नई दिशा देने का माध्यम है, वहीं अगर इस तरह की घटनाएं होंगी, तो यह देश के भविष्य के लिए एक गंभीर सवाल है।
अब देखना यह है कि क्या इस निर्दयी शिक्षक को कड़ी सजा मिलती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।