महाकुंभ 2025 : भगदड़ के बाद श्रद्धालुओं की संख्या घटी, प्रशासन की सख्ती से श्रद्धालु परेशान

प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ के बाद प्रशासन की सख्ती से श्रद्धालु परेशान हो रहे हैं। प्रशासन ने वाहनों का प्रवेश रोक वीआईपी पास रद्द कर दिए हैं, 4 फरवरी तक प्रतिबंध लागू।

Thu, 30 Jan 2025 14:57:14 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

प्रयागराज महाकुंभ 2025 : बुधवार को प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ की घटना के बाद गुरुवार को श्रद्धालुओं की संख्या में कमी देखी गई। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कई सख्त कदम उठाए हैं। मेले में आने-जाने के रास्तों को अलग कर दिया गया है, जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्रयागराज शहर में वाहनों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है और मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल ज़ोन’ घोषित कर दिया गया है। यहां अब किसी भी प्रकार के वाहन प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, VVIP पास भी रद्द कर दिए गए हैं। यह प्रतिबंध 4 फरवरी तक लागू रहेंगे।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि वह भगदड़ पीड़ितों से मिलने नहीं जाएंगे क्योंकि भाजपा इसे राजनीति का रंग दे सकती है। वहीं, उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस घटना की जांच के लिए आयोग का गठन किया गया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार और मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने मेला क्षेत्र का दौरा किया और उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर भगदड़ मची थी। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में लगा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित दर्शन एवं स्नान का अवसर मिले।

आज दोपहर 12 बजे तक लगभग 1.15 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं। हालांकि, मौनी अमावस्या के अवसर पर मंगलवार और बुधवार की रात भगदड़ मच गई थी, जिसमें 35 से 40 लोगों की मौत हो गई। सरकार ने अब तक 30 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है, जबकि 60 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

2019 के कुंभ में तैनात रहे दो वरिष्ठ IAS अधिकारी, आशीष गोयल और भानु गोस्वामी को तत्काल प्रयागराज बुलाया गया है। उनकी सहायता से व्यवस्थाओं को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि आगे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार से भगदड़ पर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही, याचिका में यह भी कहा गया है कि भविष्य में धार्मिक आयोजनों में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर पुण्य की डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं को घर लौटने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मेले से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते नहीं खोले जाने के कारण लोग 18-20 किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हुए।

वहीं गाजीपुर से आए एक श्रद्धालु को हार्ट अटैक आने के कारण मौके पर ही गिर पड़े। उनके साथ चल रहे लोगों ने उन्हें सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के दबाव के कारण उनकी जान नहीं बच सकी। लोगों ने पुलिस और प्रशासन को कोसते हुए कहा कि इस तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए प्रशासन को पहले से तैयार रहना चाहिए था।

इस बार प्रशासन ने मेले में 30 पांटून पुल तैयार किए थे ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके, लेकिन मुख्य स्नान पर्व पर प्रशासन ने चार को छोड़कर बाकी सभी पुल बंद कर दिए। इससे स्नान के बाद बाहर निकलने वालों का दबाव बढ़ गया। लोगों ने पहले पुल पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से पुल खोलने की गुहार लगाई, लेकिन जब उनकी नहीं सुनी गई तो हंगामा होने लगा। पुलिस का कहना था कि यह उच्चाधिकारियों के आदेश पर किया गया है।

संगम क्षेत्र में स्नान के बाद बाहर निकलने के लिए लोग रास्ता खोजते रहे, लेकिन अधिकांश पांटून पुल बंद थे। दोपहर बाद प्रशासन ने घोषणा की कि केवल पीपापुल नंबर 18 और 21 खुले हैं, जिससे श्रद्धालु इन पुलों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तक पैदल चलने को मजबूर हुए। इस दौरान प्रशासन की ओर से खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी, जिससे लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

गोरखपुर के रहने वाले प्रभुनाथ दूबे अपनी पत्नी के साथ मेले में आए थे। स्नान के बाद जब वे निकलने लगे तो पुल बंद होने के कारण भारी भीड़ में फंस गए। इस बीच, उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा और भीड़ में ही उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी ने बताया कि प्रभुनाथ भाजपा से जुड़े हुए थे और गोरखपुर सांसद रवि किशन के करीबी थे। नेटवर्क समस्या के कारण उनकी पत्नी किसी को फोन तक नहीं कर सकीं।

महाकुंभ का आज 18वां दिन है। 13 जनवरी से अब तक 27.58 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं। कल मौनी अमावस्या के अवसर पर ही लगभग 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई अहम कदम उठाए गए हैं, लेकिन भगदड़ के बाद व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। आगामी महत्वपूर्ण स्नान पर्वों को देखते हुए प्रशासन की चुनौती और बढ़ गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारू रूप से आयोजन संपन्न कराना अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

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