लखनऊ: वाराणसी से लौट रही महिला का अपहरण, रेप के प्रयास और हत्या, मुख्य आरोपी अजय कुमार का एनकाउंटर

लखनऊ में वाराणसी से लौट रही महिला के अपहरण, रेप के प्रयास और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी, हिस्ट्रीशीटर ऑटो चालक अजय कुमार को मुठभेड़ में मार गिराया, जिस पर ₹1 लाख का इनाम था।

Fri, 21 Mar 2025 22:22:20 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

लखनऊ: बनारस से इंटरव्यू देकर अपने बहन के यहां लखनऊ जा रही महिला के अपहरण, रेप और हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और दुबग्गा का हिस्ट्रीशीटर ऑटो चालक अजय कुमार का एनकाउंटर कर दिया। शुक्रवार को अजय कुमार को मुठभेड़ में गोली लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अजय पर पुलिस ने आज ही एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।

कैसे हुआ घटनाक्रम का खुलासा

इससे पहले पुलिस ने आरोपी के भाई दिनेश कुमार को शुक्रवार दोपहर मलिहाबाद कस्बे के संन्यासी बाग से गिरफ्तार किया। पूछताछ में दिनेश ने चौंकाने वाले खुलासे किए। दिनेश के मुताबिक, मंगलवार रात अजय कुमार ने आलमबाग बस अड्डे से वाराणसी से लौट रही एक महिला को ऑटो में बिठाकर अगवा किया। इसके बाद अजय ने दिनेश को दुबग्गा से फोन कर बुलाया। दोनों महिला को मलिहाबाद के भदवाना इलाके में एक आम के बाग में ले गए, जहां महिला के साथ रेप की कोशिश की गई। महिला के विरोध करने पर दोनों ने उसकी पैजामी से गला घोंटकर हत्या कर दी।

परिवार की सतर्कता से मिला सुराग

महिला के भाई ने बताया कि उसकी बहन रात डेढ़ बजे आलमबाग बस अड्डे पर पहुंची थी और चिनहट के लिए ऑटो लिया। रास्ते में बहन ने भाभी को फोन कर बताया कि ऑटो चालक की हरकत संदिग्ध है। उसने लोकेशन भी भेजी थी, जिसमें वाहन मलिहाबाद की तरफ बढ़ता दिखा। इसके बाद जब भाभी ने दोबारा कॉल किया, तो फोन पर चीख-पुकार सुनाई दी और कॉल कट गई। परिवार ने तुरंत 112 नंबर पर सूचना दी।

पुलिस की लापरवाही उजागर, 7 पुलिसकर्मी सस्पेंड

महिला के भाई द्वारा समय रहते पुलिस को सूचना देने के बावजूद पुलिस की कार्रवाई में लापरवाही बरती गई। इसकी वजह से घटना को टाला नहीं जा सका। इसी को लेकर आलमबाग इंस्पेक्टर कपिल गौतम समेत 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। सस्पेंड किए गए पुलिसकर्मियों में आलमबाग बस स्टैंड चौकी प्रभारी राम बहादुर, एसआई कमरूजमा, हेड कॉन्स्टेबल राजेश कुमार, विजय यादव, पीआरवी 4821 कमांडर शिव नन्दन सिंह और हेड कॉन्स्टेबल पंकज यादव भी शामिल हैं।

कैसे पहचान छिपा रहा था आरोपी

घटना के समय अजय कुमार ने अपने ऑटो की नंबर प्लेट हटा दी थी ताकि पहचान न हो सके। लेकिन वारदात के बाद बचाव के लिए उसने दोबारा नंबर प्लेट लगा ली। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और सर्विलांस के जरिए अजय और दिनेश की लोकेशन ट्रेस की।

आरोपियों का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अजय कुमार दुबग्गा का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ 23 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे, जबकि उसके भाई दिनेश पर भी 9 से अधिक आपराधिक मामले थे। अजय कुमार के खिलाफ लूट, डकैती, मारपीट और अन्य संगीन धाराओं में केस दर्ज थे।

क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक टीम की त्वरित कार्रवाई

घटना के बाद डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की कई टीमें गठित की गईं। महिला का शव सुबह 5 बजे मोहम्मद नगर तालुकेदारी के पास आम के बाग में मिला। मौके से फोरेंसिक टीम ने अहम साक्ष्य जुटाए।

जनता में आक्रोश, पुलिस पर उठे सवाल

इस दर्दनाक घटना ने लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में आक्रोश फैला दिया है। लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी, जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारों को निलंबित कर दिया गया। वहीं, पुलिस की सक्रियता से अजय कुमार के एनकाउंटर के बाद कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन सवाल यह है कि अगर समय पर सतर्कता बरती जाती तो शायद इस जघन्य वारदात को रोका जा सकता था।

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