Thu, 06 Mar 2025 22:47:05 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
वाराणसी/मथुरा: इस वर्ष होली के पावन पर्व पर रंगभरी एकादशी से पहले एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन किया जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी और श्री कृष्ण जन्मस्थान, मथुरा के बीच परस्पर उपहारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इस अनूठे आयोजन के तहत श्री काशी विश्वनाथ धाम से भगवान विश्वनाथ द्वारा श्री कृष्ण जन्मस्थान मथुरा में विराजमान लड्डू गोपाल को उपहार भेंट किए जाएंगे। वहीं, श्री कृष्ण जन्मस्थान से भगवान लड्डू गोपाल द्वारा श्री विश्वेश्वर महादेव को उपहार सामग्री प्रदान की जाएगी।
इस पवित्र आयोजन की पहल श्री काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, श्री विश्व भूषण द्वारा की गई है। उन्होंने श्री कृष्ण जन्मस्थान, मथुरा के सचिव श्री कपिल शर्मा और गोपेश्वर चतुर्वेदी जी के साथ इस संबंध में विस्तृत चर्चा की। श्री कृष्ण जन्मस्थान के अधिकारियों ने भी इस विचार का सहर्ष स्वागत और समर्थन किया है।
श्री विश्व भूषण ने बताया कि आज दिनांक 6 मार्च को दोनों मंदिरों के प्रबंधन द्वारा ईमेल के माध्यम से परस्पर अनुरोध और प्रस्ताव प्रेषित किए गए हैं। इस आयोजन के तहत श्री कृष्ण जन्मस्थान, मथुरा से बाबा विश्वनाथ को अबीर, गुलाल, रंग आदि भेंट किए जाएंगे। वहीं, श्री काशी विश्वनाथ धाम से भगवान लड्डू गोपाल के लिए भस्म, अबीर-गुलाल, वस्त्र और चॉकलेट आदि उपहार प्रदान किए जाएंगे।
यह आयोजन सनातन धर्म की दो प्रमुख धाराओं, श्री कृष्ण भक्ति और शिव भक्ति, को जोड़ने वाला एक अभिनव प्रयास है। मथुरा और काशी दोनों ही मोक्षदायिनी नगरियां हैं, और इन दो तीर्थस्थलों के बीच समन्वय और श्रद्धा का यह आदान-प्रदान सनातन धर्म की परंपराओं को और समृद्ध करेगा।
रंगभरी एकादशी का पर्व भगवान कृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण ने राधा रानी को रंगभरी एकादशी की कथा सुनाई थी। तभी से यह पर्व मनाया जाता है। काशी विश्वनाथ धाम में भी रंगभरी एकादशी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, जो न केवल स्थानीय महत्व रखता है, बल्कि इसका वैश्विक महत्व भी है।
इस उपहार आदान-प्रदान के साथ, दोनों धामों के भक्तों को विशेष रूप से भगवान लड्डू गोपाल के रूप में बाल स्वरूप के भगवान और बाबा विश्वनाथ से आशीर्वाद प्राप्त होगा। इस अवसर पर दोनों पवित्र स्थलों से उपहार भेजते समय तथा परस्पर प्राप्त उपहार स्वीकार करते समय समारोहपूर्वक उत्सव भी किया जाएगा।
यह आयोजन न केवल धार्मिक एकता को मजबूत करेगा, बल्कि सनातन धर्म की समृद्ध परंपराओं को भी अक्षुण्ण रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।