वाराणसी: हर्षा रिछारिया ने काशी विश्वनाथ जी में टेका मत्था, घाटों पर बनवाई वीडियो

महाकुंभ में चर्चा में रहीं हर्षा रिछारिया ने वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और अयोध्या में रामलला का आशीर्वाद लिया, उन्होंने कहा कि वे जल्द ही एक बड़ी घोषणा करने वाली हैं।

Fri, 07 Mar 2025 13:13:28 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

वाराणसी: महाकुंभ में चर्चा में रहीं हर्षा रिछारिया गुरुवार को काशी पहुंचीं। यहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन किए और अन्नपूर्णा मंदिर में भी माता के दरबार में हाजिरी लगाई। इस दौरान महंत शंकरपुरी ने हर्षा को माता की चुनरी और प्रसाद भेंट किया। हर्षा ने गंगा घाटों पर नाव सवारी की और वीडियो शूट भी कराया।

दर्शन के बाद हर्षा ने कहा, बाबा विश्वनाथ का दर्शन करके मन को बड़ी शांति मिली। कर्म को अच्छा रखिए जनाब... क्योंकि शीश चढ़ाकर पूजा तो रावण ने भी बहुत की थी। याद रखना, जब-जब एक अकेले इंसान के खिलाफ आधा समाज खड़ा होता है, तब-तब भगवान स्वयं उस इंसान के साथ खड़े होते हैं।

हर्षा ने अपनी काशी यात्रा का वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। कैप्शन में उन्होंने लिखा, लंका नहीं बचा पाए शीश चढ़ाने वाले... तो फिर किस वहम में हैं ये भगवान शिव को दूध चढ़ाने वाले..

हर्षा रिछारिया बुधवार को अयोध्या पहुंची थीं, जहां उन्होंने रामलला का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा, "अभी मेरा मंदिरों में दर्शन-पूजन का कार्यक्रम चल रहा है। हफ्तेभर में बड़ी घोषणा करने वाली हूं। रामलला के दरबार में हाजिरी लगाकर मैंने उनसे इसके लिए अनुमति भी मांग ली है।"

हर्षा ने अयोध्या को भव्य और दिव्य नगरी बताया और कहा, रामलला का स्वरूप बहुत ही मनमोहक है। आने वाले दिनों में आप मुझे धर्म के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ते हुए देखेंगे। मैं युवाओं को धर्म से जोड़ूंगी। अभी हम जातियों के आधार पर अलग-अलग बैठे हैं। इन सबको एक करने का प्रयास करूंगी।

हर्षा रिछारिया ने 9 दिन पहले 25 फरवरी की शाम सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने सुसाइड की धमकी दी थी। उन्होंने रोते हुए कहा था, कुछ धर्म विरोधी लोग AI से मेरे वीडियो एडिट कर बदनाम कर रहे हैं। मुझे महादेव ने जिस हद तक हिम्मत दी है, उस हद तक मैं लड़ूंगी। मैं सामना करूंगी, लेकिन जिस दिन मैं टूट गई, उस दिन सबका नाम लिखकर जान दे दूंगी।

हर्षा ने कहा कि उन्होंने महाकुंभ से प्रतिज्ञा ली थी कि वह हिंदुत्व के लिए काम करेंगी और युवाओं को जागरूक करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ धर्म विरोधी लोग रात-दिन उन्हें आगे बढ़ने से रोक रहे हैं।

4 जनवरी को महाकुंभ के लिए निरंजनी अखाड़े की पेशवाई निकली थी, जिसमें हर्षा रिछारिया संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे साध्वी बनने पर सवाल किया था। हर्षा ने जवाब दिया था, मैंने सुकून की तलाश में यह जीवन चुना है। मैंने वह सब छोड़ दिया, जो मुझे आकर्षित करता था।

इसके बाद हर्षा सुर्खियों में आ गईं और ट्रोलर्स के निशाने पर भी रहीं। मीडिया ने उन्हें 'सुंदर साध्वी' का नाम दिया। हालांकि, हर्षा ने स्पष्ट किया कि वह साध्वी नहीं हैं, बल्कि केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हैं।

इस बीच, आनंद स्वरूप महाराज ने एक वीडियो जारी कर कहा कि पेशवाई के दौरान मॉडल को रथ पर बैठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, इससे समाज में गलत संदेश फैलता है। धर्म को प्रदर्शन का हिस्सा बनाना खतरनाक है। साधु-संतों को इससे बचना चाहिए, नहीं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

20 जनवरी को हर्षा रिछारिया ने कैलाशानंद महाराज का पंडाल छोड़ दिया था और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी के संरक्षण में रहने लगीं। हर्षा ने रविंद्र पुरी को अपना पिता बताया था।

हर्षा मूलरूप से मध्य प्रदेश के भोपाल की रहने वाली हैं, लेकिन वर्तमान में उत्तराखंड में रहती हैं। उनके सोशल मीडिया पर लाखों से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जहां वह धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट साझा करती हैं।

हर्षा रिछारिया की यात्रा और उनके विचारों ने एक बार फिर से धर्म और समाज के बीच चर्चा को गर्म कर दिया है। उनकी आगामी घोषणा को लेकर भी लोग उत्सुक हैं।

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