गाजीपुर: आकाशीय बिजली का कहर, बाइक सवार दंपती और 8 माह के मासूम बेटे की दर्दनाक मौत

गाजीपुर के दिलदारनगर क्षेत्र में शुक्रवार को आकाशीय बिजली गिरने से बाइक सवार दंपती और उनके आठ माह के मासूम बेटे की मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

Fri, 21 Mar 2025 22:01:17 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

गाजीपुर: कहते हैं कि मौत कभी बताकर नहीं आती। लेकिन जब वह किसी परिवार की खुशियों को इस बेरहमी से छीन ले, तो पूरे गांव का कलेजा कांप उठता है। गाजीपुर जिले के दिलदारनगर क्षेत्र के कर्मा गांव में शुक्रवार को कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जब आसमान से गिरी बिजली ने एक साथ बाइक सवार दंपती और उनके आठ माह के मासूम बेटे की जान ले ली। हादसे के बाद पूरा गांव शोक में डूब गया, हर आंख नम थी, हर दिल दहला हुआ था।

दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करने वाले रविशंकर कुशवाहा (32) अपने घर शादी समारोह और होली पर्व के अवसर पर कुछ दिनों के लिए कर्मा गांव आए थे। साथ में पत्नी सरोज (30) और आठ माह के बेटे अंकुश को भी लेकर आए थे। कौन जानता था कि यह खुशी का सफर मौत के सन्नाटे में बदल जाएगा।

गुरुवार की सुबह वह अपने ससुराल, सरहुला गांव से पत्नी और बेटे को बाइक पर लेकर लौट रहे थे। तभी नगसर-दिलदारनगर मुख्य मार्ग पर अचानक मौसम बिगड़ गया, काले बादल उमड़ने लगे, बिजली गरजने लगी और देखते ही देखते तीनों पर कहर बनकर गिरी आकाशीय बिजली। तीनों वहीं सड़क पर अचेत हो गए।

स्थानीय लोग दौड़े, उन्हें तत्काल दिलदारनगर के निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें गाजीपुर रेफर कर दिया। परिजनों ने आस की एक आखिरी डोर पकड़े क्षेत्र के एक अन्य अस्पताल में भर्ती कराया, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया। गांव में हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार गूंजने लगी।

शुक्रवार को गांव में जो दृश्य था, उसने पत्थर दिलों को भी पिघला दिया। जमानिया श्मशान घाट पर एक ही चिता सजाई गई। पति-पत्नी के शवों के बीच उनके मासूम बेटे अंकुश का नन्हा शव रखा गया। जब बड़े भाई ने तीनों को मुखाग्नि दी, वहां मौजूद हर व्यक्ति की रुलाई फूट पड़ी।

किसी ने सच ही कहा है, दुख की कोई जात-पात नहीं होती। कर्मा गांव में शुक्रवार को हर जात, हर वर्ग के लोग एक साथ खड़े थे। अर्थी को देख हर कोई सन्न था। किसी मां ने अपने बेटे को कसकर पकड़ लिया तो किसी ने अपनी आंखें छुपा लीं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक का दिल दहल उठा।

परिवार की महिलाएं विलाप कर रही थीं, होली के लिए आए थे, त्योहार क्या लाए, उजड़ कर चले गए।

ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है। हादसे के बाद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी शोक संवेदना प्रकट की, लेकिन परिवार की जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई असंभव है।

यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन तमाम ग्रामीण इलाकों में चेतावनी है जहां मौसम के बदलते मिजाज को नजरअंदाज कर दिया जाता है। गांव की मिट्टी आज भी नम है, हवाओं में चीखें घुली हैं और दिलों में एक ही सवाल इतनी जल्दी क्यों चले गए।

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