गाजीपुर: कामाख्या धाम के पास ट्रेलर ने झोपड़ी रौंदी, तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत, मचा कोहराम

गाजीपुर के गहमर में कामाख्या धाम के पास एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने झोपड़ी को रौंद डाला, जिसमें तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई और परिवार में कोहराम मच गया, दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

Sat, 05 Apr 2025 12:57:56 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

गाजीपुर का काला शुक्रवार: झोपड़ी में सो रहे परिवार पर टूटा मौत का कहर, तीन मासूमों ने तड़पते हुए तोड़ा दम। रात की नमी में लिपटी थी मासूम नींद, लेकिन किसे पता था कि सुबह की पहली किरणें किसी घर की रौशनी नहीं, मातम की परछाईं लेकर आएंगी।

गाजीपुर जनपद के गहमर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मां कामाख्या धाम के समीप शुक्रवार की रात एक ऐसा दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसने न सिर्फ एक परिवार की खुशियों को रौंद डाला, बल्कि पूरे इलाके की आत्मा को झकझोर कर रख दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एक तेज़ रफ्तार ट्रेलर, जो शायद थकान या लापरवाही की गिरफ्त में था, झोपड़ी में चैन की नींद सो रहे पांच लोगों पर कहर बनकर टूटा। लोहा, पहिये और स्पीड के इस बेमरहम संगम ने तीन मासूमों की कोमल सांसें एक झटके में छीन लीं। हादसे के बाद घटनास्थल पर जो मंजर था, वो किसी बर्बादी के मैदान से कम नहीं था – चीख-पुकार, टूटी चारपाइयां, बिखरे खिलौने और खून से सना एक उजड़ चुका सपना।

सन्नाटे में गूंजती पुकारें:

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग घटनास्थल पर दौड़े। कुछ की आंखों में गुस्सा था, कुछ की आंखों में आंसू। लेकिन हर चेहरा यह सवाल कर रहा था – "आखिर कब तक?" घायल दो लोगों को तत्काल भदौरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

ट्रेलर बना काल का वाहन, चालक गिरफ्तार:

घटना के बाद ट्रेलर चालक मौके से फरार हो गया था। परंतु गाजीपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कुछ ही घंटों में उसे बिहार बॉर्डर के पास धर दबोचा। शुरुआती पूछताछ में यह सामने आया है कि ट्रेलर तेज़ रफ्तार में था और चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया था।

मां-बाप के कंधे पर ताबूत, गांव में पसरा मातम:

तीनों मासूम बच्चों की मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, वहां मातम का माहौल छा गया। मांओं की सूनी निगाहें, पिता का कांपता कंधा और भाइयों की बिलखती आवाजें – ये दृश्य दिल को चीर देने वाले थे। स्कूल बैग, चप्पल और बिस्तर – सब वहीं थे, पर वो नन्ही जानें अब इस दुनिया में नहीं थीं।

प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं व आगे की कार्यवाही:

पुलिस ने मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी।

कब थमेगा सड़क पर मौत का यह नंगा नाच:

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, एक सामाजिक सवाल है। जब तक ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं होगा, जब तक ओवरलोड और ओवरस्पीड वाहनों पर शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक ऐसे हादसे किसी ना किसी झोपड़ी की नींद उड़ा देंगे।

गाजीपुर की इस घटना ने जो जख्म छोड़े हैं, वो समय के साथ भी शायद ही भर पाएंगे। आज एक परिवार नहीं, पूरा गांव शोक में डूबा है। और हम सब को खुद से यह पूछना होगा – क्या हमारी सड़कें सिर्फ वाहनों के लिए हैं, या इंसानों के लिए भी।

इस हादसे ने सिर्फ तीन मासूमों की जान नहीं ली, बल्कि हमारी संवेदनाओं को भी झकझोरा है – और ये सवाल किया है कि क्या हम वाकई एक सुरक्षित समाज में जी रहे हैं।

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