क्रिकेटर शमी के परिवार का मनरेगा घोटाला उजागर, प्रशासनिक जांच में हुआ लाखों का फर्जीवाड़ा

अमरोहा में क्रिकेटर मोहम्मद शमी के परिवार का मनरेगा घोटाला उजागर, जिसमें शमी की बहन और रिश्तेदारों ने फर्जी तरीके से लाखों रुपये की मजदूरी हड़प ली, प्रशासन ने जांच के बाद रिकवरी के आदेश दिए।

Mon, 31 Mar 2025 15:14:50 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

अमरोहा: क्रिकेटर मोहम्मद शमी के परिवार से जुड़े मनरेगा घोटाले का पर्दाफाश होते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यह मामला अमरोहा जिले के जोया ब्लॉक के पलौला गांव से जुड़ा हुआ है, जहां शमी की बहन शबीना, उनके पति गजनबी और अन्य परिजनों के नाम मनरेगा मजदूरों की सूची में पाए गए। जांच में सामने आया कि इन लोगों ने फर्जी तरीके से मजदूर के रूप में पंजीकरण कराया और सरकारी योजना के तहत लाखों रुपये की मजदूरी अपने खातों में प्राप्त कर ली। प्रशासन ने अब इस गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए दोषियों से लगभग दस लाख रुपये की रिकवरी करने का निर्णय लिया है।

इस मामले की तह तक जाने के लिए जिला अधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने जांच के आदेश दिए थे। जब विकास खंड अधिकारी ने मजदूरी भुगतान का रिकॉर्ड खंगाला, तो यह बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। गांव की प्रधान गुले आयशा, जो कि शमी की बहन शबीना की सास हैं, पर भी इस घोटाले में संलिप्त होने का शक गहराने लगा। प्रशासन ने पाया कि प्रधान के परिवार के आठ सदस्यों ने मनरेगा मजदूरी के रूप में लाखों रुपये हड़प लिए। आंकड़ों के अनुसार, शमी की बहन शबीना ने ₹71,013, उनके पति गजनबी ने ₹66,561, देवर शेखू ने ₹55,312, नसरुद्दीन ने ₹71,704, आमिर सुहेल ने ₹63,851, ननद नेहा ने ₹55,867, सरिया ने ₹54,645 और सबा रानी ने ₹17,020 की मजदूरी प्राप्त की। इसके अलावा, जांच में यह भी खुलासा हुआ कि परिवार के अन्य 12 सदस्य, जिनमें कुछ लोग विदेश में भी रहते हैं, इस फर्जीवाड़े का हिस्सा थे। कुल मिलाकर, इस घोटाले की रकम लगभग दस लाख रुपये बताई जा रही है।

जांच में यह भी सामने आया कि 2021 में इन लोगों के जॉब कार्ड बनाए गए थे, जब पंचायत में प्रशासक की तैनाती थी। उसी दौरान इन लोगों के नाम सूची में जोड़े गए और फिर लगातार तीन वर्षों तक इन लोगों को मजदूरी का भुगतान होता रहा। हालांकि, 2024 में जब प्रशासन ने इन जॉब कार्डों की समीक्षा की, तब जाकर इस घोटाले का भंडाफोड़ हुआ। अब प्रशासन ने न केवल इन सभी फर्जी जॉब कार्डों को निरस्त कर दिया है, बल्कि दोषियों से पैसे की वसूली करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

डीसी मनरेगा अमरेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि इस गड़बड़ी को अंजाम देने वाले सभी लोगों को नोटिस भेजे जाएंगे और उनसे पूरी राशि की रिकवरी की जाएगी। यदि दोषी समय पर पैसे वापस नहीं करते, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा, प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि क्या इस घोटाले में ग्राम पंचायत के किसी अन्य अधिकारी की भूमिका रही है।

यह पहली बार नहीं है जब मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। इससे पहले भी कई जिलों में अपात्र लोगों को मजदूरी के पैसे मिलने के मामले प्रकाश में आए हैं, लेकिन इस बार मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन की सख्त निगरानी के बावजूद ऐसी धांधलियां कैसे हो रही हैं, यह भी एक बड़ा सवाल है। इस मामले में दोषियों को कब तक सजा मिलती है और प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है, यह देखना अब दिलचस्प होगा।

यूपी खबर समाचार पत्र आपको इस मामले से जुड़ी हर नई जानकारी सबसे पहले उपलब्ध कराएगा।

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