Wed, 26 Mar 2025 15:34:44 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
वाराणसी: बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व सांसद जयाप्रदा अपने स्वर्गीय भाई राजा बाबू की अस्थियों के विसर्जन के लिए सोमवार को वाराणसी पहुंचीं। गंगा तट पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जब उन्होंने परिजनों के साथ अस्सी घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अस्थि कलश को पवित्र गंगा में प्रवाहित किया।
अस्सी घाट से मणिकर्णिका तक अंतिम यात्रा
गंगा के पावन जल में अपने भाई की अस्थियों का विसर्जन करने से पहले जयाप्रदा बजड़े (नौका) पर सवार हुईं। उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। इस दौरान ब्राह्मणों ने विधिपूर्वक संस्कार संपन्न कराया। नौका अस्सी घाट से मणिकर्णिका घाट तक गंगा की लहरों पर बहती रही, और पूरा माहौल वैदिक मंत्रों व गंगा आरती की दिव्यता से भावुक हो उठा।
जयाप्रदा सफेद सूट-सलवार और सिर पर सफेद दुपट्टा डाले, गहरे दुख में डूबी नजर आईं। उनकी आंखों में भाई को खोने का दर्द साफ झलक रहा था, लेकिन उन्होंने पूरे संयम और श्रद्धा के साथ विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न किया।
भाई राजा बाबू के निधन से शोक में डूबीं जयाप्रदा
जयाप्रदा के बड़े भाई राजा बाबू, जो एक अभिनेता और फिल्म निर्माता थे, का हाल ही में हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और 27 फरवरी को दोपहर 3:26 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार 28 फरवरी को हैदराबाद में किया गया था।
जयाप्रदा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भाई के निधन की सूचना देते हुए लिखा, अत्यंत दुःख के साथ मैं आपको अपने बड़े भाई श्री राजा बाबू के निधन की सूचना दे रही हूं। कृपया उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में रखें।
फिल्मों से राजनीति तक, जयाप्रदा का सफर
80 और 90 के दशक की सुपरस्टार रहीं जयाप्रदा ने महज 13 साल की उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। अपने शानदार अभिनय और सौम्य व्यक्तित्व से उन्होंने खुद को बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों में शामिल किया। सरगम, शराबी, तोहफा, मकसद और आवाज जैसी सुपरहिट फिल्मों में उनकी अदाकारी ने लोगों का दिल जीत लिया।
हालांकि, फिल्मी करियर के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और सांसद बनीं। उन्होंने समाजवादी पार्टी से शुरुआत की थी और बाद में कई अन्य राजनीतिक दलों में भी सक्रिय रहीं।
गंगा तट पर उमड़ा श्रद्धा और शोक का माहौल
वाराणसी के गंगा तट पर भाई की अस्थियां विसर्जित करते समय जयाप्रदा बेहद भावुक नजर आईं। उनके साथ मौजूद परिजनों और वहां मौजूद अन्य श्रद्धालुओं ने भी इस क्षण को गहरी संवेदना के साथ देखा। अस्थि विसर्जन के दौरान घाट पर मौजूद कई लोगों ने उन्हें सांत्वना दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
गंगा की लहरों के बीच जब राजा बाबू की अस्थियां प्रवाहित की गईं, तो ऐसा लगा मानो एक अध्याय समाप्त हो गया हो। जयाप्रदा की आंखों में आंसू थे, लेकिन उनके चेहरे पर संतोष भी था कि उन्होंने अपने भाई को वाराणसी में मोक्षदायिनी गंगा के पवित्र जल में अंतिम विदाई दी।