Sat, 22 Mar 2025 21:29:29 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
सहारनपुर: हृदय विदारक खबर गंगोह कस्बे की तंग गलियों में शनिवार दोपहर जैसे कयामत उतर आई। हवा में बारूद की गंध और चीखों का सन्नाटा गूंज रहा था। सहारनपुर में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष योगेश रोहिला ने वह कर डाला जिसकी कल्पना से भी रूह कांप जाए।
उन्होंने अपनी ही जान से प्यारी तीन मासूम संतानों—11 साल की बेटी श्रद्धा, 6 साल का देवांश और 4 साल का शिवांश—को अपनी लाइसेंसी पिस्टल से मौत की नींद सुला दिया। इतना ही नहीं, पत्नी नेहा (31) पर भी गोलियां चलाईं, जो जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।
खुद पुलिस को फोन कर कहा- मैंने सबको खत्म कर डाला
प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसे के बाद योगेश रोहिला ने खुद फोन उठाया और सहारनपुर के SSP को बताया—मैंने सबको मार डाला।
क्या बीत रही होगी उस पुलिस अफसर पर, जो ये शब्द सुनकर स्तब्ध रह गया होगा। क्या कभी किसी पिता के हाथ इतने पत्थर हो सकते हैं कि वह अपनी ही संतानों का जीवन छीन ले?
गलियों में गूंजते मासूमों की चीखें और खामोश पड़ोसी
घटना के समय पड़ोसियों ने ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज सुनी। दरवाजे से अंदर झांका तो फर्श पर खून का दरिया था—बच्चों की नन्हीं देह लहूलुहान पड़ी थी, आंखें बंद थीं, जैसे अब सपनों में भी लौटकर न आएंगे। पास ही नेहा तड़प रही थी।
पड़ोसी भागे, भीड़ इकट्ठा हुई, और वहीं खड़ा मिला योगेश। भागने की कोशिश की तो गुस्साई भीड़ ने पकड़कर धुन दिया।
प्राथमिक जांच में पता चला है कि योगेश को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। यह शक इतना जहरीला हो गया कि उसने न केवल एक पत्नी का विश्वास तोड़ा, बल्कि तीन मासूम जिंदगीयों को मौत के मुंह में धकेल दिया।
यह महज एक क्राइम स्टोरी नहीं है, यह एक समाज के बीमार होते मानसिक ढांचे की तस्वीर है। शक, क्रोध और स्वामित्व की भावना ने इंसान को ऐसा दरिंदा बना दिया कि अपने ही घर के दीवारों पर अपने खून के छींटे लगा बैठा।
गंगोह कस्बा स्तब्ध है। हर आंख नम, हर दिल भारी है। जिन बच्चों की हंसी गलियों में गूंजती थी, अब वहां मातम पसरा है। स्कूल के साथी दोस्तों के मुंह सिले हैं। मोहल्ले के लोग सवालों में घिरे हैं। क्या शक इतनी बड़ी कीमत वसूल सकता है।
नेहा मेडिकल कॉलेज में जिंदगी की जंग लड़ रही है। उसके शरीर से ज्यादा उसके दिल पर चोट गहरी है। अपने बच्चों की चीखें शायद उसकी आखिरी सांस तक पीछा करेंगी।
वहीं योगेश रोहिला अब कानून के शिकंजे में है, लेकिन समाज के मन में ये सवाल बाकी है। कब हम अपने भीतर के अविश्वास और गुस्से से बाहर निकलेंगे।
एक अपील, हिंसा से पहले रुकें, सोचें, बात करें
आज सहारनपुर की गलियों से उठी ये खबर महज आंकड़ों में सिमट कर न रह जाए। हर घर, हर इंसान इसे आईना बना कर देखे। क्या हम अपने रिश्तों में संवाद के पुल नहीं बना सकते, क्या शक की दीवारें तोड़ने का साहस नहीं कर सकते?
इस घटना ने न केवल एक परिवार, बल्कि पूरे समाज की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है।