Sat, 22 Mar 2025 22:17:51 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
बहराइच: जिले के कतर्नियाघाट वन क्षेत्र से सटे भैसाही गांव में शुक्रवार की शाम जो मंजर देखने को मिला, उसने हर दिल को दहला दिया। एक मां अपने चार साल के मासूम बेटे को आंगन में बैठाकर खाना खिला रही थी। सब कुछ सामान्य था, लेकिन अगले ही पल गांव की हवाओं में चीख-पुकार गूंज उठी। एक तेंदुआ बाउंड्री फांदकर आया और संजना देवी के सामने से उनके जिगर के टुकड़े विक्की को उठा ले गया। मां चीखी, चिल्लाई, दौड़ी मगर शिकारी अपने शिकार के साथ आंखों के सामने ओझल हो गया।
संजना देवी ने बताया कि बेटे को खाना खिलाते समय वह उसे पानी लाने के लिए नल तक गई थीं। नल तक पहुंचते ही देखा कि एक तेंदुआ दीवार फांदकर विक्की को झपट कर ले गया। उनकी चीखें सुनकर गांव के अन्य लोग लाठी-डंडा लेकर दौड़े। पर तब तक तेंदुआ बच्चे को खेतों की ओर ले जा चुका था। ग्रामीण जब मौके पर पहुंचे, तो दिल दहला देने वाला दृश्य सामने था, मासूम विक्की का चेहरा और पेट तेंदुए के नुकीले दांतों का शिकार बन चुका था। जैसे-तैसे ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाई, लाठी-डंडे लेकर तेंदुए को भगाया, लेकिन तब तक विक्की दुनिया छोड़ चुका था।
बेटे की लहूलुहान लाश देख मां संजना मौके पर ही बेहोश हो गईं। पिता विशाल के पैरों तले जमीन खिसक गई। मासूम का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
घटना के बाद पूरे भैसाही गांव में मातम पसरा है। हर आंख नम है, हर चेहरा डरा-सहमा है। विक्की की मामी कैलाश रानी ने बताया कि तेंदुए के बच्चे को उठाकर ले जाने की खबर फैलते ही पूरा गांव विशाल के घर पर उमड़ पड़ा। ग्रामीण टॉर्च, लाठी और डंडा लेकर खेतों में विक्की को तलाशने निकले। बाग में तेंदुआ विक्की को नोच रहा था। टार्च की रोशनी और डंडों के सहारे ग्रामीणों ने उसे भगाया।
वन विभाग को रात में ही सूचना दे दी गई थी, लेकिन विभाग की टीम सुबह मौके पर पहुंची। फिलहाल गांव के बाहर पिंजरा लगाया गया है। बावजूद इसके, ग्रामीणों में डर का माहौल है। कोई अपने बच्चों को घर के बाहर नहीं भेज रहा। ग्रामीण खुद ही रात-रात भर पहरा दे रहे हैं।
अभी शुक्रवार की घटना की दहशत कम नहीं हुई थी कि शनिवार को फिर तेंदुए ने हमला बोल दिया। भैसाही गांव के 55 वर्षीय किसान राम मनोहर खेत में भैंस चरा रहे थे, तभी झाड़ियों से निकलकर तेंदुआ उन पर झपटा। तेंदुए ने उनकी गर्दन दबोच ली। चीख-पुकार सुनकर अन्य किसान दौड़े और किसी तरह तेंदुए को भगाया। गंभीर रूप से घायल राम मनोहर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली से मोतीपुर रेफर किया गया।
यह पहला मौका नहीं है जब भैसाही और आसपास के गांवों में तेंदुए ने जान का नुकसान किया हो। 15 जनवरी को पड़ोसी गांव तमोलिन पुरवा में भी आठ साल की बच्ची शालिनी तेंदुए का शिकार बन चुकी है। उसके माता-पिता खेत में काम कर रहे थे, तभी घात लगाए तेंदुए ने शालिनी पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया था।
प्रभागीय वनाधिकारी बी. शिव शंकर ने बताया कि बच्चे की मौत तेंदुए के हमले में हुई है। शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। शनिवार को पिंजरा लगाया गया है। गांव के बाहर विभाग की टीम तैनात है।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग घटनाओं के बाद भी सजग नहीं है। यदि समय रहते पिंजरे और सुरक्षा उपाय किए जाते, तो विक्की और राम मनोहर की यह दुर्गति न होती।
भैसाही और आसपास के गांवों में लोगों की जिंदगी जैसे तेंदुए के साए में आ गई है। हर मां अपने बच्चे को छाती से चिपकाए बैठी है, हर किसान खेतों में जाने से डर रहा है। सवाल यही है क्या वन विभाग इस खूनी सिलसिले को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाएगा, या फिर गांव के मासूम इसी तरह जंगली दरिंदों का निवाला बनते रहेंगे।