Thu, 03 Apr 2025 11:25:38 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
वाराणसी: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (यूपीपीसीबी) के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड के तहत संचालित रमना प्लांट की तीन माह के भीतर जांच करें और उपचारात्मक व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह आदेश एनजीटी की प्रधान पीठ नई दिल्ली के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की दो सदस्यीय पीठ ने दिया।
निवासियों की शिकायत के बाद हरकत में आया एनजीटी:
याचिकाकर्ता राकेश रंजन और राहुल प्रताप की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने एनजीटी के समक्ष दलील पेश करते हुए कहा कि रमना प्लांट के कारण स्थानीय निवासियों को गंभीर प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। प्लांट से निकलने वाले धुएं और गंदे पानी की वजह से वायु और जल प्रदूषण बढ़ रहा है।
प्रदूषण की मार झेल रहे हैं स्थानीय लोगों ने बताया कि प्लांट के कारण इलाके में भयंकर दुर्गंध फैल रही है। जल स्रोत दूषित हो रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
प्लांट द्वारा बफर जोन और ग्रीन बेल्ट नहीं बनाए गए, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है।
अब तक अनसुनी रही थी स्थानीय निवासियों की शिकायत:
अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने एनजीटी को बताया कि स्थानीय निवासियों ने कई बार अपनी शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रशासनिक उदासीनता के कारण हालात बद से बदतर हो गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्लांट की गतिविधियाँ सीधे तौर पर पर्यावरणीय नियमों की अवहेलना कर रही हैं।
एनजीटी का सख्त रुख, जल्द होगी कार्रवाई:
एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यूपीपीसीबी को निर्देश दिया कि वह तीन माह के भीतर प्लांट की विस्तृत जांच करे और दोषी पाए जाने पर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे।
प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम:
यह आदेश उन हजारों ग्रामीणों के लिए राहत भरा है, जो लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहे हैं। एनजीटी के इस फैसले से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है और आने वाले दिनों में इससे जुड़ी अहम कार्रवाइयों पर सबकी नजर बनी रहेगी।