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वाराणसी: गंगा में डूब रहे बुजुर्ग को नाविकों ने बचाया, अस्सी से तुलसी घाट तक सुरक्षा दुरुस्त करने की मांग

वाराणसी: गंगा में डूब रहे बुजुर्ग को नाविकों ने बचाया, अस्सी से तुलसी घाट तक सुरक्षा दुरुस्त करने की मांग

वाराणसी के तुलसी घाट पर गंगा में स्नान करते समय एक बुजुर्ग व्यक्ति के डूबने पर नाविकों ने तत्परता से उन्हें बचाया, जिसके बाद घाट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।

वाराणसी: गंगा के पवित्र घाटों पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं, लेकिन कई बार यहां सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण हादसे हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला तुलसी घाट पर देखने को मिला, जहां गंगा में डूब रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति को नाविकों ने बहादुरी दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के बाद नाविकों और स्थानीय लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की है कि अस्सी से तुलसी घाट तक किनारे की मिट्टी को ठीक किया जाए, जिससे स्नान करने वालों को फिसलन और डूबने के खतरे से बचाया जा सके।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार की सुबह वाराणसी के तुलसी घाट पर स्नान के दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में बहने लगे। घाट पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया, जिसके बाद पास में मौजूद रवि साहनी ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत नदी में छलांग लगा दी। काफी मेहनत के बाद नाविकों ने बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद घाट पर मौजूद लोग नाविकों की इस बहादुरी की सराहना करने लगे।

बचाए गए बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा, मैं स्नान कर रहा था, तभी अचानक मेरा पैर फिसल गया और मैं गहरे पानी में चला गया। मुझे तैरना नहीं आता था, इसलिए खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। अगर नाविक समय पर न आते, तो मेरी जान चली जाती। इस घटना के बाद घाट पर मौजूद नाविकों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि गंगा घाटों की नियमित मरम्मत और सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं बार-बार होती रहती हैं।

नाविक संघ ने बताया कि, अस्सी से तुलसी घाट तक गंगा किनारे की मिट्टी बेहद खराब हो चुकी है। घाटों पर फिसलन इतनी ज्यादा है कि लोग संभल नहीं पाते और गहरे पानी में चले जाते हैं। नगर निगम को जल्द से जल्द घाटों की मरम्मत करनी चाहिए और स्नान के लिए सुरक्षित जगहों का चिह्नांकन करना चाहिए।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब यहां ऐसी घटना हुई है। हर साल कई श्रद्धालु गंगा स्नान के दौरान फिसलकर डूबने लगते हैं। कुछ को बचा लिया जाता है, लेकिन कई बार लोगों की जान भी चली जाती है। प्रशासन को चाहिए कि यहां रस्सियों और जंजीरों की व्यवस्था करे, ताकि लोग सहारा लेकर स्नान कर सकें। तुलसी घाट और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।

स्थानीय लोगों और नाविकों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि—
✅ गंगा घाटों की मिट्टी को समतल किया जाए और फिसलन कम करने के उपाय किए जाएं।
✅ घाटों पर रस्सी और जंजीरों की व्यवस्था की जाए, जिससे लोग स्नान के दौरान संतुलन बना सकें।
✅ जल पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जाए और घाटों पर लाइफगार्ड तैनात किए जाएं।
✅ स्नान करने वालों के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, जिससे वे गहरे पानी में जाने से बचें।

गंगा घाटों की महत्ता धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से है, लेकिन इनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन की लापरवाही लगातार हादसों को जन्म दे रही है। अगर नगर निगम और प्रशासन समय रहते उचित कदम उठाए, तो इन घटनाओं को रोका जा सकता है। नाविकों की बहादुरी ने एक बुजुर्ग की जान बचा ली, लेकिन हर किसी की किस्मत इतनी अच्छी नहीं होती। प्रशासन को अब इस दिशा में गंभीरता से काम करना होगा, ताकि श्रद्धालु गंगा स्नान को भयमुक्त होकर कर सकें।

Published By : SANDEEP KR SRIVASTAVA Updated : Fri, 31 Jan 2025 01:03 PM (IST)
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Tags: varanasi news ganga river boatmen ganga putra

Category: local news uttar pradesh varanasi

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